अखबार से ज्ञात हुआ कि सिमडेगा जिले के राजू मेहर अपने बेटे को इलाज कराने के लिए रिम्स में भर्ती किया था. मगर डॉक्टरों से इलाज करने से इनकार कर दिया. डॉक्टरों का कहना था कि सांस के रोगों का इलाज यहां नहीं होता है. बच्चा वापस सदर अस्पताल सिमडेगा लाया गया, जहां वह दम तोड़ दिया. रिम्स ने पूरे झारखंड को शर्म से झुका दिया.
लाखों वेतन पानेवाले डॉक्टर और अरबों खर्च करने वाला रिम्स एक बच्चे की सांस का इलाज नहीं कर सकता है, इससे शर्म की बात और क्या हो सकती है. न यहां टीबी, कैंसर का इलाज होता है, और न एड्स का. क्या यहां सिर्फ शव का पोस्टमार्टम होता है? हमेशा रिम्स में हड़ताल और मारपीट ही हेाता है. सरकार को रिम्स पर ध्यान देने की जरूरत है.
सुशील बरला, खलारी
