भारतीय गांवों की बात करें, तो मन में गांवों की अलग अगल तस्वीरें बनने लगती है, जहां पक्की सड़क न हो, जहां बेरोजगारी चरम सीमा पर हो, जहां अशिक्षा हो, जहां बच्चे नंगे खेल रहे हों या न जाने इस तरह की कितनी ही तसवीर. और काफी हद तक इन तसवीरों में सच्चाई भी होती है.
भारत एक विशाल जनसंख्या वाला देश है, जिसका एक बहुत बड़ा हिस्सा गांवों में बसा है. आज हम निकल पड़े है शहरों को स्मार्ट बनाने और मेट्रो ट्रेनों की चाह में. बेशक शहरों की तरक्की जरूरी है, पर शायद शहरों को बनाने सवांरने की होड़ में हम गांवों की समस्याओं को नजरअंदाज करते जा रहे हैं. जरूरत है शहरों के विकास के साथ साथ हम गांवों की तसवीरों को भी बेहतर करने का प्रयास करें.
ऐमन अफरोज, मांडर
