शकुन-अपशकुन

परंपराएं गांव और शहर में फर्क नहीं करती. सभी जानते हैं कारोबार नीबू-मिर्ची के भरोसे नहीं चलता है फिर भी इस भेड़चाल ने शहर को पूरी तरह जकड़ रखा है. सुना है लाखों का व्यापार करता ‘टोटकों’ का बाजार शहर का नया स्टार्टअप है. शुभ-लाभ के लिए शकुन-अपशकुन का ख्याल रखना बुरी बात नहीं, मगर […]

परंपराएं गांव और शहर में फर्क नहीं करती. सभी जानते हैं कारोबार नीबू-मिर्ची के भरोसे नहीं चलता है फिर भी इस भेड़चाल ने शहर को पूरी तरह जकड़ रखा है. सुना है लाखों का व्यापार करता ‘टोटकों’ का बाजार शहर का नया स्टार्टअप है. शुभ-लाभ के लिए शकुन-अपशकुन का ख्याल रखना बुरी बात नहीं, मगर पुराने नींबूओं को बीच सड़क पर फेंक देना अच्छी बात है क्या? बेशक तरक्की के लिए धंधों को बुरी नजरों से बचायें, मगर पीले पड़े नींबूओं को हर बार सही ठिकाना तो मिले.

एमके मिश्रा, रातू, रांची

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