जून में लगी आग अभी भी जारी है

उत्तर प्रदेश चुनावी दंगल में मुख्यमंत्री अखिलेश के लिए स्थिति अनुकूल होने का नाम ही नहीं ले रही है. जब भी पार्टी में कुछ मामला सुलझता हुआ नजर आता है, वैसे ही विवादों का एक नया शिगूफा छुट जाता है. अब चाचा शिवपाल का चुनाव के बाद पार्टी बनाने के एलान और पिता के चुनाव […]

उत्तर प्रदेश चुनावी दंगल में मुख्यमंत्री अखिलेश के लिए स्थिति अनुकूल होने का नाम ही नहीं ले रही है. जब भी पार्टी में कुछ मामला सुलझता हुआ नजर आता है, वैसे ही विवादों का एक नया शिगूफा छुट जाता है. अब चाचा शिवपाल का चुनाव के बाद पार्टी बनाने के एलान और पिता के चुनाव प्रचार में शामिल होने से इंकार, अखिलेश को आगामी चुनाव को प्रभावित तो करेगा ही, फिलहाल उनकी मुसीबतें कम होती नहीं दिख रही हैं.
चुनाव के रणक्षेत्र में जब अखिलेश को यह एहसास हुआ कि विगत 6 महीनों की नौटंकी और एंटी इनकमबेंसी फैक्टर का भी उन्हें सामना करना पड़ सकता है, तो उन्होंने कांग्रेस के साथ गंठबंधन कर चुनाव लड़ने का फैसला किया. इस फैसले के बाद मुलायम कांग्रेस के प्रत्याशियों के खिलाफ अपने कार्यकर्ताओं को निर्दलीय ही चुनाव लड़ने का आह्वान कर रहे हैं. इस घटनाक्रम से यादव, मुसलिम समीकरण के साथ चुनाव में अग्रिम पंक्ति में बैठने का सपना देख रहे गंठबंधन दल को थोड़ा परेशानी में डाल जरूर दिया है.
नवीन शर्मा, इमेल से

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