देश में अच्छे-बुरे नेताओं की सूची लंबी है. कुछ अपने किये गये अच्छे कामों के लिए गिने जाते हैं, जबकि कुछ अपने ऊलजुलूल कामों से बदनामी की छाप छोड़ जाते हैं. केजरीवाल एक ऐसे नेता हुए, जो हवा के झोंके की तरह ईमानदारी का तमगा लिये दिल्ली के तख्त पर बैठे और अपने सामने जिम्मेवारियों का पहाड़ देख कर मौके से खिसक लिये.
महज 49 दिनों में दर्जनों छोटे-बड़े झूठे वादे कर, जनता को गुमराह कर, नियम-कानून को धता बता कर बचकाना हरकत करने में कामयाब रहे. खुद को देश का एकमात्र पाक-साफ नेता घोषित करने में लगे रहे. जनता भी इन्हें देश का अवतारी पुरुष समझने लगी, लेकिन जल्द ही इनके काम करने का अंदाज उजागर हो गया. जनता अब इनकी चालबाजी को समझ चुकी है. स्थिति ऐसी है कि जो होड़ पार्टी में जाने को थी, उस पर विराम सा लग गया है.
संतोष कुमार, देवघर
