तौबा इस सिनेमाई ए बी सी डी.. से!

।। विशाल दत्त ठाकुर।। (प्रभात खबर, देवघर) भारतीय सिनेमा को समाज का आईना कहा जाता है. इससे हमारा स्वस्थ मनोरंजन होता है. लेकिन इन दिनों जो फिल्में आ रही हैं, उनमें न तो समाज के लिए कोई सकारात्मक संदेश दिखता है और न ही उनका समाज पर कोई अच्छा असर पड़ता है. इसके उलट, समाज […]

।। विशाल दत्त ठाकुर।।

(प्रभात खबर, देवघर)

भारतीय सिनेमा को समाज का आईना कहा जाता है. इससे हमारा स्वस्थ मनोरंजन होता है. लेकिन इन दिनों जो फिल्में आ रही हैं, उनमें न तो समाज के लिए कोई सकारात्मक संदेश दिखता है और न ही उनका समाज पर कोई अच्छा असर पड़ता है. इसके उलट, समाज खास कर युवाओं में बढ़ते फैशन, हिंसा, खुलापन, भटकाव के लिए सिनेमा को ही जिम्मेवार माना जाता है.

अब इसका नकारात्मक असर नौनिहालों पर भी देखा जा रहा है. अबोध बच्चे जिनकी पढ़ाई शुरू होने वाली है, वे फिल्मों द्वारा फैलायी जा रही बुराइयों से नहीं बच पा रहे हैं. अंगरेजी माध्यमों के बढ़ते स्कूलों के कारण आज हम अपने बच्चों को अ आ इ ई.. के बदले पहले ए बी सी.. ही लिखना व बोलना सिखा रहे हैं. बच्चों को कहीं भी ए फॉर एप्पल, बी फॉर बैट या सी फॉर कैट सुनायी दे, तो तुरंत उनका ध्यान उस ओर खिंच जाता है. लेकिन, पिछले दिनों आयी कुछ फिल्मों में ए बी सी.. का मतलब इतना वल्गर तरीके से बताया और दिखाया गया है कि बच्चे बिगड़े नहीं तो और क्या करें? फिल्म ‘ग्रैंड मस्ती’ में ए फॉर.. बी फॉर.. सी फॉर.. का मतलब अश्लीलता की सारी हदें पार करते दिखाया गया है. इससे ‘एडल्ट’ दर्शकों को तो बहुत मजा आया, लेकिन छोटे बच्चों के माता-पिता को शर्मिदगी महसूस हुई.

अगर आप टीवी खोलें और किसी चैनल पर ‘आर राजकुमार’ का गाना ‘ए बी सी डी पढ़ ली बहुत, अब करेंगे गंदी बात..’ बजने लगे और आपके बच्चे इसका अर्थ पूछ बैठें, तो आपको कोई जवाब नहीं सूङोगा. यकीन मानिए, मेरे साथ पिछले कुछ दिनों से ऐसा ही हो रहा है. मेरा साढ़े तीन साल का बेटा ए बी सी.. वाला गाना बजाने की जिद करता रहता है. और, यदि किसी चैनल पर इस तरह का गाना चलता दिख जाता है तो इसका मतलब पूछने लगता है और उसे बार-बार बजाने की जिद करता है. आप चाहते हुए भी इन बच्चों को ऐसे गानों व फिल्मों से नहीं बचा सकते. टीवी पर किसी न किसी चैनल पर इस तरह के गानों व फिल्मों का ट्रेलर हमेशा चलता रहता है. हालिया रिलीज हुई फिल्म ‘यारियां’ का गाना ‘ए से आओ रे आओ, बी से.. सी से चिल्ला के गाओ, डी से दारू पीते जाओ..’ और न जाने क्या-क्या.

इतना ही नहीं, आज की फिल्मों में हमारी राष्ट्रीय और धार्मिक भावनाओं का भी धड़ल्ले से मजाक उड़ाया जा रहा है. फिल्म ‘रामलीला’ में राम के नाम पर जम कर हिंसा व ईलता दिखायी गयी है. वहीं फिल्म ‘यारियां’ के एक सीन में भारत माता का घोर अपमान हुआ है. इसमें भारत माता को छोटे कपड़ों में ईल तरीके से ‘शीला की जवानी..’ गाते दिखाया गया है. इस तरह की फिल्मों व गानों का असर जनमानस पर कितना नकारात्मक हो रहा है, इस बारे में सेंसर बोर्ड व सरकार को ध्यान देने की जरूरत है.

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