कुछ अनूठा कर दिखाने की महत्वाकांक्षा का जमीनी सच्चाई का मेल न हो, तो ईमानदार कोशिश भी बेकार हो सकती है. भारत दुनिया की सबसे बड़ी आर्थिक ताकतों के बीच अपना मुकाम बनाना चाहता है और हमारी सारी उम्मीद देश में मौजूद युवा-शक्ति के हुनर, उद्यमिता और निवेश पर टिकी है.
निवेश अपने लाभ को सुनिश्चित करने के लिए सक्षम विधि-व्यवस्था की गारंटी चाहता है, पर विडंबना यह है कि इस जिम्मेवारी को लेकर केंद्र और राज्य सरकारें गंभीर नहीं हैं. कानून और न्याय का राज तभी सही रूप में कायम हो सकता है, जब पुलिस महकमा और अदालतों का काम बगैर बाधा के चले. लेकिन, संख्या-बल के मामले में इन दोनों की हालत पतली है. न्यायालयों में जजों की कमी है. पुलिस तंत्र की खस्ताहाली को लेकर भी आखिरकार न्यायालय को ही आगे आना पड़ा है.
पुलिसकर्मियों के तकरीबन पांच लाख पद खाली पड़े होने से जुड़ी याचिका पर सुनवाई में सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह राज्यों के गृहसचिवों से पुलिसकर्मियों के खाली पदों के पूरे आंकड़े मांगे और चार हफ्ते के भीतर बताये कि बहाली के लिए क्या कदम उठाये गये हैं. संभव है, अदालती आदेश के बाद सरकारों की नींद खुले, पर रोजमर्रा के प्रशासन को चुस्त-दुरुस्त रखने की अहमियत समझाने के लिए अदालतों को आगे आना पड़े, तो यही माना जायेगा कि कार्यपालिका और विधायिका अपनी जिम्मेवारी के प्रति पूरी तरह से गंभीर नहीं हैं. अपराधों की बढ़ती संख्या और आतंकवादी गतिविधियों की रोकथाम तथा आम जन-जीवन की सुरक्षा के लिए पर्याप्त पुलिस बल का होना बहुत जरूरी है. तीन साल पहले संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के हवाले से खबर आयी थी कि भारत में प्रति लाख आबादी पर 138 पुलिसकर्मी ही हैं और भारत इस मामले में 71 देशों की सूची में सबसे नीचे के पांच देशों में है.
वर्ष 2015 के मॉनसून सत्र में सरकार ने खुद कहा था कि जनवरी, 2014 तक पुलिसकर्मियों के 5.6 लाख पद खाली पड़े थे और यह संख्या कुल सृजित पद (22.8 लाख) का तकरीबन एक चौथाई है. वर्ष 2015 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, देश में पुलिसकर्मियों के 26,63,222 पद हैं और इनमें 9,42,121 पद भरे जाने हैं. उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा 54 फीसदी पद खाली हैं. इसके बाद गुजरात (36.7 फीसदी) और बिहार (34.1फीसदी) का स्थान है. उम्मीद है कि अब इस आदेश के बाद सरकारें मसले की गंभीरता समझते हुए पुलिसकर्मियों के खाली पद भरने के लिए त्वरित कदम उठायेगी.
