सदन की कार्यवाही को किसी न किसी तरह से स्थगित करने में माहिर हैं विपक्षी दल. भले वह किसी भी मुद्दे को ही लेकर क्यों न हो, सदन को चलने नहीं देते. इसी सत्र को पिछले आठ दिनों से बाधित कर रखा है. विकास की कोई बात तक नहीं करना चाहता है.
बजट पर विमर्श से कोई मतलब नहीं, विपक्ष की गरिमा का कोई ध्यान नहीं. मगर, जब बात आयी वेतन बढ़ाने की, तो सभी दल एकजुट हो गये. केवल अपने राज्य में ही नहीं पूरे देश में कमोबेश यथास्थिति बनी हुई है. बिना कोई सख्त कदम के इस दौर की यथास्थिति बदलनेे वाली नहीं है. वक्त है एक सुसंगत और ठोस कानून बनाने की.
हरिश्चंद्र महतो, बेलपोस, चक्रधरपुर
