यह सही है कि आम आदमी पार्टी के अध्यक्ष अरविंद केजरीवाल की छवि एक ईमानदार नेता की है. उन्होंने राजनीति को अपना पेशा नहीं, बल्किसमाज-सेवा माना है. इसमें भी कोई दो राय नहीं कि उनके पास आम लोगों से जुड़ी अच्छी नीतियां हैं, लेकिन जब दिल्ली की गद्दी उन्हें मिली, तो क्या यह उनकी जिम्मेदारी नहीं थी कि वह राजनीतिक कौशल से राज-काज चलाते और लोगों को मुनाफा प्रदान करते, उनके हितों की रक्षा करते?
लेकिन उन्होंने क्या किया, हठ करके या अवसर देख कर अपनी ही सरकार गिरा दी. अब जब दिल्ली में उनकी सरकार रही नहीं, तब कैसे उनके वायदे पूरे होंगे और जनता की उम्मीदें पूरी होंगी? काश! अरविंद केजरीवाल मुख्यमंत्री पद से अपना इस्तीफा सौंपने के पहले इस बारे में भी सोच लेते. राजनीति में धैर्य और संयम तो सबसे जरूरी हथियार हैं.
कुमार अंबुज, ई-मेल से
