धोखे से डरे निवेशक

बड़े वैश्विक कॉरपोरेशनों के अनेक शीर्ष अधिकारी धोखाधड़ी के डर से भारत में निवेश करने से कतराते हैं. व्यापारिक चुनौतियों का अध्ययन और उनका समाधान उपलब्ध करानेवाली संस्था क्रॉल ने 545 शीर्ष अधिकारियों का सर्वेक्षण करके बताया है कि इनमें से 19 फीसदी लोगों ने इसी कारण भारत में निवेश नहीं किया है. फर्जीवाड़े और […]

बड़े वैश्विक कॉरपोरेशनों के अनेक शीर्ष अधिकारी धोखाधड़ी के डर से भारत में निवेश करने से कतराते हैं. व्यापारिक चुनौतियों का अध्ययन और उनका समाधान उपलब्ध करानेवाली संस्था क्रॉल ने 545 शीर्ष अधिकारियों का सर्वेक्षण करके बताया है कि इनमें से 19 फीसदी लोगों ने इसी कारण भारत में निवेश नहीं किया है. फर्जीवाड़े और साइबर सुरक्षा की चिंता के लिहाज से चीन के बाद भारत दूसरे स्थान पर है. तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और विशाल बाजार के कारण भारत अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के लिए बड़ा आकर्षण है. ऐसे में यह शिकायत बेहद चिंताजनक है. रिपोर्ट के मुताबिक, 2016 में 68 फीसदी भारतीय कंपनियां अलग-अलग तरह की धोखाधड़ी का शिकार हुई थीं. इनमें प्रबंधन के हितों के टकराव, भ्रष्टाचार और रिश्वत, बाजार की खींचतान और आंतरिक स्रोतों जैसे कारक हैं. इसका मतलब यह है कि फर्जीवाड़े के अधिकतर कारण बाह्य कारकों से जुड़े हुए नहीं हैं.
डिजिटल प्रक्रिया के तीव्र विस्तार के कारण साइबर सुरक्षा को लेकर मुश्किलें भी बढ़ रही हैं. इसी के साथ प्राकृतिक आपदाओं, हड़ताल, हिंसा जैसे कारक भी निवेशकों को मुंह फेरने पर विवश करते हैं. एक दिलचस्प तथ्य यह भी सामने आया है कि विदेशी कंपनियां भारतीय कंपनियों के साथ इसलिए भी साझेदारी करती हैं क्योंकि देशी कंपनियां सरकारों और अधिकारियों के तौर-तरीकों को बेहतर ढंग से समझती हैं तथा अपना काम निकाल लेती हैं. इसे लेकर कॉरपोरेशनों में गड़बड़ी की आशंका भी पैदा होती है. व्यापार जगत के जानकार यह भी बताते हैं कि भ्रष्टाचार को कॉरपोरेशन समस्या की तरह न देख कर व्यापारिक गतिविधियों से जुड़े खर्च का हिस्सा मानते हैं. यह देश की आर्थिक छवि के लिए शुभ संकेत नहीं है.
इस सर्वेक्षण में विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत कंपनियों के लोग शामिल हैं. इस लिहाज से इसे बहुत गंभीरता से लिया जाना चाहिए. भारत में व्यापार को सुगम बनाने के लिए सरकार प्रयासरत है, पर इस दिशा में ठोस पहलों की दरकार है. वित्तीय लेन-देन, नियमों और कार्यान्वयन में पारदर्शिता लाने, लालफीताशाही पर अंकुश लगाने तथा फर्जीवाड़े और भ्रष्टाचार के दोषियों को दंडित करने के लिए समुचित कानूनी और प्रशासनिक उपाय किये जाने चाहिए, ताकि निवेशक बेफिक्र होकर भारत के आर्थिक विकास में योगदान कर सकें.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >