सेना प्रमुख जनरल विपिन रावत ने यह तुगलकी फरमान सुनाया कि सेना के जवान अपनी भावनाओं की अभिव्यक्ति के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल न करें व ऐसा करनेवाले अपराधी हैं, उनके इस कृत्य के लिए उन्हें सजा दी जायेगी. जनरल का यह बयान कहीं से तर्कसंगत नहीं कहा जा सकता.
देश के जवान अपनी जान हथेली पर रखकर देश की रक्षा करते हैं, बिना रुके बिना थके ड्यूटी पर डटे रहते हैं. इतना सब सहने के बाद क्या देश उन्हें दो वक्त की रोटी ढंग से नहीं दे सकता? क्यों उन्हें बोलने का हक नहीं है सिर्फ इसलिए कि वे सेना में हैं? जनरल ने कहा ऐसा करने से दूसरे सैनिकों का मनोबल गिरेगा, तो जनाब मनोबल तब गिरता है जब बड़े-बड़े अफसर जवानों से घरेलू नौकरों की तरह काम करवाते हैं, जब सच बोलने पर अपराधी का तमगा दे दिया जाता है. सरकार को चाहिए कि वह स्वयं इस मामले में हस्तक्षेप करे.
डॉ शिल्पा जैन, वारंगल, तेलंगाना
