संस्कार की धज्जियां उड़ाते विज्ञापन

आजकल हाई टेक्नोलॉजी और डिजिटल दुनिया में हम बड़ी तेजी से बढ़े जा रहे हैं लेकिन कुछ अच्छी बातें पीछे छूट रही हैं. आज तक हमारा भारत संस्कारों के लिए जाना जाता था पर अब क्या? कुछ पाने से ज्यादा कुछ खो रहे हैं शायद. क्या टीवी में वो विज्ञापन देखा है जिसमें बच्चा अपनी […]

आजकल हाई टेक्नोलॉजी और डिजिटल दुनिया में हम बड़ी तेजी से बढ़े जा रहे हैं लेकिन कुछ अच्छी बातें पीछे छूट रही हैं. आज तक हमारा भारत संस्कारों के लिए जाना जाता था पर अब क्या? कुछ पाने से ज्यादा कुछ खो रहे हैं शायद. क्या टीवी में वो विज्ञापन देखा है जिसमें बच्चा अपनी टीचर से कहता है कि टीचर जी कल रात आपने पालक की सब्जी खायी?
और दूसरे में बच्चा गर्व से कहता है कि फटाक से हो गया. बच्चे में नम्रता तो दूर-दूर तक दिखाई नहीं देती. एक और जिसमें बच्चा अपने पिता से घमंड पूर्वक बातें करता है. इन सब से हम बच्चों को क्या सीख दे रहे हैं? विज्ञापन बनाने वालों से कहना चाहती हूं कि हमें इस तरह के विज्ञापन से परहेज कर ऐसा विज्ञापन बनाना चाहिए जिससे आनेवाली पीढ़ी को हम अपना संस्कार दे सकें, बता सकें.
शांता राय, रांची

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