रोड सेन्स रखें हम सभी

आये दिन हमें सड़कों पर गाड़ियों से ठोकर लगे घायल मृत श्वान पड़े मिलते हैं जिससे हम बच बचा कर अपनी अपनी मंजिल की ओर निकल पड़ते हैं. इस बात से इनकार नहीं कि इन बेजुबानों को सड़कों पर चलने का हम सभी नागरिकों की तरह ‘रोड सेन्स’ नहीं होता. लेकिन इन बेजुबानों को अपनी […]

आये दिन हमें सड़कों पर गाड़ियों से ठोकर लगे घायल मृत श्वान पड़े मिलते हैं जिससे हम बच बचा कर अपनी अपनी मंजिल की ओर निकल पड़ते हैं. इस बात से इनकार नहीं कि इन बेजुबानों को सड़कों पर चलने का हम सभी नागरिकों की तरह ‘रोड सेन्स’ नहीं होता.
लेकिन इन बेजुबानों को अपनी स्पीड का शिकार बनाकर हम अपने कौन से ‘सेन्स’ का परिचय देते हैं? जरा सोचिए, विकास के भागमभाग में हम उस पशु मित्र को शिकार बना रहे हैं, जो सभ्यता के विकास क्रम में मानव का पहला मित्र बना था. कहते हैं कि अंतरिक्षयान में पहला प्राणी श्वान ही था जिसे यात्रा पर भेजा गया था. बरहाल, ये प्राणी आज भी इंसान से इंसानियत का सबूत मांगते हैं. हमें अपने रोड सेन्स को बनाये रखना चाहिए.
विभूति पी, इमेल से

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