राजकोट (गुजरात) के एक ही सहकारी बैंक में नोटबंदी के बाद 871 करोड़ रुपये जमा किये गये, 4500 नये खाते खोले गये. एक ही मोबाइल नंबर से पांच दर्जन से अधिक खाते शुरू किये गये. आयकर विभाग की कार्रवाई में ऐसी चौंकानेवाली हकीकत सामने आयी है.
यह मिसाल ध्यान में रखते हुए जिन पर संदेह है ऐसे बाकी बैंकों की तलाशी करने का अभियान तेज करना पड़ेगा. नोटबंदी के बाद सहकारी बैंकों में संशयात्मक व्यवहार बढ़ने की शंका केंद्र को लग रही थी. वह बिलकुल ही सही निकली है. बैंकों में काला धन जमा करने के बाद वह सफेद हो जायेगा, यह मंशा बैंकों में बड़ी मात्रा में धनरािश जमा करने के पीछे हो सकती है. जिस बैंक का व्यवहार सरकार से बताये गये नियमों को कुचलकर चलाया जा रहा है उनकी जांच कर के उनपर व इसमें शामिल कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए.
जयेश राणे, मुंबई
