पिछले दिनों हमारे राष्ट्रपति ने तमाम राज्यपालों एवं उपराज्यपालों को संबोधित किया. सबसे पहली बात उन्होंने विमुद्रीकरण पर की. दुनिया के तमाम बड़े अर्थशास्त्रियों ने यही भविष्यवाणी की है कि इससे फायदा कम नुकसान अधिक होगा.
बिलकुल थोड़ा-सा काला धन एवं नकली नोटों के चलते सरकार ने 99% जनता को झकझोर के रख दिया. दावा था 30% तक काला धन वापस नहीं लौटेगा. मगर अब तो 97% मुद्रा वापस बैंकों में आ गया. सरकार खुद सवालों के घेरे में फंस गयी है. जब पुराने के स्थान पर नयी मुद्रा, अगले चार महीनों में आ जायेगी, तो क्या काली अर्थव्यवस्था फिर से नहीं खड़ी हो जायेगी?
जंग बहादुर सिंह, गोलपहाड़ी
