रांची में बढ़ते अपराध

विगत एक सप्ताह में रांची को अपराधियों ने अपने कब्जे में ले लिया है. 16 दिसंबर की रात एक काली रात साबित हुई, जिसमें रांची की बूटी बस्ती में 19 वर्षीय निर्भया के साथ दुर्भाग्यपूर्ण घटना घटी. इससे राजधानी रांची सहित पूरे राज्य में आक्रोश की लहर फैल गयी है. जिस समय रांची सहित पूरे […]

विगत एक सप्ताह में रांची को अपराधियों ने अपने कब्जे में ले लिया है. 16 दिसंबर की रात एक काली रात साबित हुई, जिसमें रांची की बूटी बस्ती में 19 वर्षीय निर्भया के साथ दुर्भाग्यपूर्ण घटना घटी. इससे राजधानी रांची सहित पूरे राज्य में आक्रोश की लहर फैल गयी है. जिस समय रांची सहित पूरे देश में दिल्ली में घटित निर्भया कांड को याद किया जा रहा था, उस समय रांची में इसी तरह की दुर्भाग्यपूर्ण निर्भया कांड की पुनरावृत्ति दोहराई गयी.
दिल्ली निर्भया कांड के बाद केंद्र ने निर्भया फंड बनाया जिससे कि दोबारा इस तरह की दुर्भाग्यपूर्ण घटना न हो. लेकिन इस देश में निर्भया फंड का मात्र 10% प्रतिशत ही राशि इस वर्ष खर्च हो पायी. एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी पुलिस उन अपराधियों का कोई सुराग नहीं खोज पायी है. इसी से पता चलता है कि यहां का पुलिस प्रशासन कितनी मुस्तैद है! राज्य की राजधानी में बेटियों को सुरक्षा प्रदान करने में असमर्थ है, तो राज्य के अन्य इलाकों की कल्पना ही की जा सकती है.
अजय पटेल, इमेल से

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