हिसाब की बड़ी चुनौती

नोटबंदी का मुख्य उद्देश्य बिना कर चुकाये अर्जित की गयी नकदी को सामने लाना है. सरकारी आदेश के मुताबिक बैंक 31 जनवरी तक ऐसे खातों की जानकारी आयकर विभाग को दे देंगे जिनमें निर्धारित सीमा से अधिक रुपया जमा कराया गया है. जनधन खातों में यह सीमा 50 हजार, बचत खातों में ढाई लाख और […]

नोटबंदी का मुख्य उद्देश्य बिना कर चुकाये अर्जित की गयी नकदी को सामने लाना है. सरकारी आदेश के मुताबिक बैंक 31 जनवरी तक ऐसे खातों की जानकारी आयकर विभाग को दे देंगे जिनमें निर्धारित सीमा से अधिक रुपया जमा कराया गया है. जनधन खातों में यह सीमा 50 हजार, बचत खातों में ढाई लाख और चालू खातों में 12.5 लाख है.
देश में बैंक खातों की संख्या लगभग 40 करोड़ है और यदि इसके एक फीसदी हिस्से की भी जांच की जरूरत पड़ी, तो आयकर विभाग को 40 लाख मामलों की पड़ताल करनी पड़ सकती है. विभाग के लिए यह बहुत बड़ी और मुश्किल चुनौती है क्योंकि उसके पास पर्याप्त संख्या में कर्मचारी नहीं हैं. रिपोर्टों के अनुसार कर आकलन कर सकनेवाले करीब 8,000 अधिकारियों में से आधे लोग प्रशासन, लेखा, मुख्यालय और प्रणालियों में कार्यरत हैं.
बचे चार हजार अधिकारी 2014-15 के वित्त वर्ष के आकलन में लगे हुए हैं. ऐसे में उन पर काम का बेहिसाब बोझ बढ़ेगा. आयकर विभाग जांच के लिए सामान्यतः सवा तीन लाख मामलों का चुनाव हर साल करता है. इस लिहाज से उपलब्ध हर अधिकारी के जिम्मे औसतन 80 मामले होते हैं. पर नोटबंदी के बाद यह 12.5 गुना बढ़ सकता है. विभाग में विभिन्न वरिष्ठ स्तरों पर करीब 1,900 पद रिक्त हैं जिनमें 400 के आसपास उप और सहायक आयुक्तों के पद हैं.
यह हाल तब है जब देश में आयकर रिटर्न भरनेवाले 2.87 करोड़ में से 1.62 करोड़ लोग कोई कर अदा नहीं करते हैं. नोटबंदी और अन्य उपायों से करदाताओं की संख्या बढ़ने की उम्मीद है और बैंकों से प्राप्त सूचनाएं कर चोरी करनेवालों को चिन्हित करने में मददगार भी हो सकती हैं. यह भी आशा की जा रही है कि कर चुकाये बिना या भ्रष्ट तरीके से की गयी कमाई भी सामने आयेगी. लेकिन, इन उपलब्धियों को समुचित तौर पर हासिल करने के लिए आयकर विभाग और राजस्व विभाग को संसाधनों के मामले में बेहतर तैयारी करनी चाहिए.
जांच में देरी या चूक भी नोटबंदी के उद्देश्यों के पूरा होने की राह बाधित कर सकती है. करों की चोरी करनेवाले व्यवस्थागत खामियों का बेजा फायदा उठाते रहते हैं. विभागीय और कानूनी प्रक्रिया का भ्रष्टाचार भी उनके लिए सहायक होता है. खातों की जांच के बाद ही 31 जुलाई तक आयकर रिटर्न भरा जा सकेगा. ऐसे में अधिकारियों की संख्या और विभागीय क्षमता का संवर्द्धन बेहद जरूरी हो जाता है.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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