‘भगवान के लिए अपना काम करें और संसद चलने दें’ यह कहकर राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने जनता के ‘मन की बात’ कही है. हंगामा करने से कुछ हासिल नहीं होता उससे तो सिर्फ जनता के करोड़ों रुपये बरबाद होते रहते है. राष्ट्रपति के कहने के बाद संसद में हो रहा हंगामा रुकनेवाला नहीं है, क्योंकि विपक्ष के विरोध के रवैये से पता चलता है कि उन्हें विरोध करते रहते ही शीत सत्र को पूरा करना है. विपक्ष के हंगामे से जनता में नाराजगी है.
हंगामा करने के लिए संसद में आना है और जनता के सवालों का उत्तर सरकार से नहीं लेना है, तो करोडों रुपये खर्च कर के सत्र क्यों चलायें? हंगामा करनेवाले सांसदों को रोकने के लिए अब तक कोई सशक्त नियम क्यों नहीं बने? हर सत्र में कोई भी मुद्दा पकड़कर सालों से चल रहा यह खेल देखकर जनता परेशान है. जिन के नाम पर यह हंगामा किया जाता है उस जनता को तो पूछा भी नहीं जाता. हम चाहे कुछ भी करें जनता हमारे साथ है यह सोचकर चलना अतिविश्वास का लक्षण है.
संचिता ठाकुर, इमेल से
