शासन के दो साल बीत जाने के बाद यह प्रतीत हो रहा है कि केंद्र सरकार निरंकुश बनती जा रही है. कई फैसले ग्रामीण भारत के अनुसार नहीं लिए जा रहे हैं. सरकार के सभी फैसले आंख बंद कर स्वीकार किये जा रहे हैं.
सरकार पर न तो जनता का दबाव है और न ही मीडिया का. देश की बड़ी घटनाओं में हालिया बड़ी संख्या में सैनिकों की शहादत, बड़ी रेल दुर्घटना तथा कमरतोड़ महंगाई. ये सभी केंद्र सरकार की विफलता है. इन मुद्दों पर मीडिया की चुप्पी निराशाजनक है. मीडिया न तो प्रधानमंत्री, न रेलमंत्री और न ही कृषि मंत्री की जवाबदेही पूछ रही है. ऐसे में सरकार किसी भी देश की निरंकुश क्यों नहीं बनेगी?
राजन राज, रांची.
