प्रभात खबर के मुख पृष्ठ पर छपे प्रमुख समाचार को पढ़ कर बड़ी तसल्ली हुई. बंदी के दौरान हुई तोड़-फोड़ के एवज में झामुमो जिला अध्यक्ष को 74.52 लाख दंड देने का आदेश हुआ है. जिस बंद को जनता के जबरदस्त समर्थन के फलस्वरूप अभूतपूर्व बंद कहा जाता है, उसके पीछे भी तोड़-फोड़ या हिंसा या हिंसा की धमकी ही रहती है. एक सुझाव है.
बंदी के दौरान गिरफ्तार होनेवालों को शाम होते नहीं छोड़ा जाये. इस बीच बंद के कारण हुए नुकसान का त्वरित आकलन भी कर लिया जाये. अाम जनता को हुए बस, ट्रेन आिद के िटकट सहित सभी नुकसान का जब भुगतान हो जाये तभी उनको हिरासत से मुक्त किया जाये, ठीक सहारा प्रमुख सुब्रतो राय की तरह. कोई घटना घटी या किसी नेता के मन के खिलाफ कोई कार्य हुआ और दूसरे ही दिन को बंद का फरमान सुना दिया जाना, घोर अमानवीय है.
परस नाथ सिन्हा , हरमू ,रांची
