इंदौर-पटना एक्सप्रेस ट्रेन के दुर्घटनाग्रस्त हो जाने से एक बार फिर रेल सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं. भारत में अंतरदेशीय परिवहन के लिए रेल सबसे बड़ा माध्यम है. रेल हादसों के बाद तो रेल सुरक्षा विभाग को ऐसे उपाय करने चाहिए कि भविष्य में इस प्रकार के हादसे पेश न हों, परंतु आरोप-प्रत्यारोप का खेल शुरू हो जाने से मुख्य मुद्दे फिर खो गये हैं.
कायदे से तो हादसे के सही-सही कारणों का पता चलना चाहिए तथा इसके लिए जिम्मेदार लोगों को बेनकाब कर उन्हें दंडित किया जाना चाहिए. वर्तमान रेल व्यवस्था को सुधारने में पूंजी लगायी जानी चाहिए, जिसका सारे देश की अर्थव्यवस्था पर व्यापक, दूरगामी और निश्चित असर पड़ेगा और इसके परिणाम भी तत्काल ही सामने आने लगेंगे. भारतीय रेल नेटवर्क देश की जीवनरेखा बन चुकी है. हमारी रेलवे प्रणाली को भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार रहना होगा. लिहाजा यदि भारतीय रेल को ‘विश्व स्तरीय रेल’ का तमगा देना ही है, तो सुरक्षा-व्यवस्था जैसे सबसे जरूरी मापदंडों पर भी इसे विश्वस्तरीय ही बनाना होगा़
अाकाश कुमार, जगराओं, पंजाब
