कहने को तो भारत और पाकिस्तान के बीच में युद्वविराम है, पर सीमा पर जो हालात हैं, उसे देखकर तो ऐसा बिलकुल नहीं लगता. सिर्फ दोनों देशों की सेनाएं आमने-सामने नहीं हैं, वरना जिस तरह फायरिंग हो रही है और संघर्ष विराम उल्लंघन की खबरें आ रही हैं, उससे संघर्ष विराम तो लगता ही नहीं है.
अक्सर हमारे जवानों के साथ मानवता को शर्मसार करने वाले व्यवहार करने की घटनाएं होती रहती हैं. विश्व समुदाय इसको दो देशों के बीच आपसी मामला कह कर दखलंदाजी से बचता है, जो काफी हद तक ठीक भी है. अब सवाल यह उठता है कि घुसपैठ और फायरिंग की घटनाओं को पाकिस्तान आतंकवादियों की करतूत बता कर और सेना का हाथ न होने की बात कह कर अपना पल्ला झाड़ लेता है, तो यह दो देशों के बीच का मामला रहा कहां? विश्व समुदाय को चाहिए कि पाकिस्तान को इराक न बनने दे और हां, आतंकवाद चाहे कहीं भी हो, पूरे विश्व के लिए खतरनाक है.
सीमा साही,बोकारो
