जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा पर पाकिस्तानी सेना की शह पर सक्रिय आतंकियों के हमले में तीन सैनिक शहीद हो गये हैं. मंगलवार को माछिल सेक्टर में हुई इस बर्बर घटना ने पाकिस्तान के खतरनाक इरादे को फिर जगजाहिर किया है. नियंत्रण रेखा और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर इस वर्ष 14 नवंबर तक पाकिस्तान 377 बार युद्ध-विराम का उल्लंघन कर चुका है.
इन हमलों में न सिर्फ अनेक जवान शहीद और घायल हुए हैं, बल्कि सीमावर्ती गांवों के निवासियों को भी निशाना बनाया गया है. कश्मीर में अस्थिरता फैलाने के लिए पाकिस्तान की ओर से घुसपैठ लगातार जारी है. सरकारी सूचना के अनुसार, सितंबर तक कम-से-कम 105 आतंकवादी भारत में घुसे हैं और घुसपैठ की 121 कोशिशें हुई हैं.
मुस्तैद सुरक्षाबलों ने 46 आतंकियों को ढेर भी किया है. भारत ने राजनयिक स्तर पर कठोरता से अपना प्रतिरोध दर्ज किया है, लेकिन पाकिस्तान पर इसका कोई असर नहीं हो रहा है. पाकिस्तान की हरकतों के कारण 2003 के युद्ध-विराम समझौते का भी कोई मतलब नहीं रह गया है. इस समझौते के 16 सालों में कभी भी उल्लंघन की इतनी घटनाएं नहीं हुई थीं, जितनी पिछले दो महीनों में हुई हैं. सियाचिन ग्लेशियर क्षेत्र को छोड़ दें, तो जम्मू-कश्मीर से लगी नियंत्रण रेखा और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर हर क्षेत्र में युद्ध-विराम समझौता महज कागजों में सिमटकर रह गया है. हालिया घटनाओं ने भारत और पाकिस्तान के बीच किसी तरह के संवाद की संभावनाओं पर भी पानी फेर दिया है.
उड़ी में सैनिक ठिकाने पर आतंकी हमले के बाद भारत कूटनीतिक रूप से वैश्विक मंच पर पाकिस्तान को अलग-थलग करने में कामयाब हो गया था, पर उसके बावजूद भी पाकिस्तानी सरकार और सेना के भारत-विरोधी तेवर नरम नहीं पड़े. मौजूदा परिस्थिति में भारत की ओर से दो स्तरों पर ठोस रणनीतिक प्रतिरोध की जरूरत है. बुधवार को भारतीय सेना ने कुछ पाकिस्तानी चौकियों पर गोलाबारी कर यह संकेत दे दिया है कि भारत द्वारा अंतरराष्ट्रीय कायदे-कानूनों को मानने और धैर्य रखने को किसी तरह की कमजोरी न माना जाये तथा जरूरत पड़ने पर पाकिस्तानी हमले का मुंहतोड़ जवाब दिया जायेगा.
सैन्य स्तर पर प्रतिकार के साथ दुनियाभर में पाकिस्तान के नापाक इरादों और हरकतों को बेनकाब कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसके विरुद्ध ठोस कार्रवाई की मांग की जानी चाहिए. दक्षिण एशिया में आतंक और अस्थिरता फैलाने की पाकिस्तान की कोशिश को बर्दाश्त करना भारत समेत क्षेत्र के अन्य देशों के लिए बुरी तरह से नुकसानदेह साबित हो सकता है.
