कानपुर के नजदीक पुखरायां में इंदौर-पटना एक्सप्रेस के दुर्घटनाग्रस्त होने के ब्योरों के बीच इसकी भयावहता की तुलना 28 मार्च, 2010 की रेल-दुर्घटना से की जाने लगी है. तब पश्चिम मिदनापुर जिले में ज्ञानेश्वरी एक्सप्रेस के दुर्घटनाग्रस्त होने से आधिकारिक तौर पर 148 लोगों की जान गयी थी और इसे 21वीं सदी के भारत का अब तक का सबसे बड़ा रेल हादसा कहा गया था.
पुखरायां की दुर्घटना से 130 से ज्यादा लोगों के जान गंवाने की बात समाचारों में कही जा रही है. दुर्घटना के ठीक-ठीक कारण का पता तो जांच के बाद ही चलेगा, तो भी दो तथ्य अभी से जाहिर हैं. एक यह कि ड्राइवर के आपात्कालिक ब्रेक लगाने के वक्त ट्रेन 110 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही थी और दूसरा यह कि जांच की संभावित दिशा रेल पटरी के बारे में यह खोजने की रहेगी कि उसमें कोई खराबी थी या नहीं. दुर्घटना के कारणों की जांच कर रहे पीके आचार्य (आयुक्त, रेल सुरक्षा) की बातों के संकेत यही हैं.
अगर जांच इसी दिशा में चलती है, तो फिर माना जायेगा कि रेलयात्रियों की जीवन की सुरक्षा के बड़े सवाल को चली आ रही परिपाटी के हिसाब से किसी रेलकर्मी की गलती के मत्थे मढ़ कर बात की इतिश्री कर दी गयी और रेलवे के बुनियादी ढांचे की खस्ताहाली के सवाल से तात्कालिक तौर पर मुंह मोड़ लिया गया. बीते तीन सालों में 50 फीसद रेल दुर्घटनाएं पटरी से ट्रेन के उतरने के कारण हुई हैं और इसमें फीसद घटनाओं की वजह रही है रेल-पटरी की खराबी. लेकिन, बात सिर्फ तीन सालों की नहीं है.
साल 2001 से 2015 के जून महीने तक के आंकड़ों यही बताते हैं कि रेल पटरी की खराबी रेल दुर्घटनाओं की सबसे बड़ी वजह रही है. रेल मंत्रालय के दस्तावेज की मानें, तो 2001 से 2015 के बीच हर साल 60 फीसदी से ज्यादा रेल-दुर्घटनाएं ट्रेन के पटरी से उतरने के कारण हुईं और आश्चर्यजनक तौर पर ऐसी ज्यादातर दुर्घटनाओं में गलती रेलकर्मी की मानी गयी. यह तथ्य सोचने पर बाध्य करता है कि कहीं हम ढांचागत खामी को मानवीय गलती कह कर दरकिनार तो नहीं कर रहे?
ज्ञानेश्वरी एक्सप्रेस के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद बनी काकोदर समिति ने भी कहा था कि संसाधनों के अभाव और बुनियादी ढांचे के खस्ताहाल होने के कारण भारतीय रेल अपेक्षित नतीजे नहीं दे रही. इंदौर-पटना एक्सप्रेस की दुर्घटना एक बार फिर से काकोदर समिति के सुझावों पर गौर करने के सबक दे रही है. उम्मीद है कि इस साल के 1.21 लाख करोड़ के रेल-बजट का एक हिस्सा रेलयात्रा को निरापद बनाने पर भी खर्च किया जायेगा.
