बहस से दूर रहना कमजोरी

नोटबंदी ,कालेधन और भ्रष्टाचार पर संसद में प्रधानमंत्री की उपस्थिति में विपक्ष खुलकर विस्तृत बहस चाहता है जो कि एक अच्छी बात है़ लोकतंत्र में बहस के बाद ही उचित फैसले से ही सर्वहित में आगे बढ़ा जा सकता है़ इसलिए अब सरकार को बहस करा कर इस उबाल और उफान पर पानी डालकर ही […]

नोटबंदी ,कालेधन और भ्रष्टाचार पर संसद में प्रधानमंत्री की उपस्थिति में विपक्ष खुलकर विस्तृत बहस चाहता है जो कि एक अच्छी बात है़ लोकतंत्र में बहस के बाद ही उचित फैसले से ही सर्वहित में आगे बढ़ा जा सकता है़ इसलिए अब सरकार को बहस करा कर इस उबाल और उफान पर पानी डालकर ही आगे बढ़ने की जरूरत है़
इसमें पार्टियों के कोष, चंदे और उनके कालेधन पर भी पर खुलकर बहस भी बहुत जरूरी है़ इससे ही सभी शक और संदेह का निवारण के साथ देश को निश्चित ही एक नयी ऐतिहासिक दिशा मिल सकती है़ ​बहस से दूर रहना तो कमजोरी ही दर्शाता है़
​वेद प्रकाश, मामूरपुर, नरेला

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