सरकार द्वारा 500 और 1000 के नोट को निरस्त करने के निर्णय से देश के करोडों मध्यम और छोटे वर्ग के परिवारों के जीवन पर सीधा असर पडा है़ फिर भी आम जनता इसे स्वीकार कर भ्रष्टाचार, आतंकवाद, नक्सलवाद और हवाला कारोबारियों के खिलाफ अपना योगदान दे रही है़
दिन-दिन भर बैंकों के कतारों में खडे होकर, कुछ लोग पैसे होते हुए भी चिकित्सीय सुविधा के अभाव मेें, किसानी में व्याप्त कठिनाईयों में रहकर और कुछ लोग भूखे प्यासे रह कर वीर गति को प्राप्त हो रहे हैं़ ये लोग भी भारत निर्माण में अपने प्राण न्योछावर कर रहे हैं, इन शोकाकुल परिवारों की सहायता के लिए भारत सरकार क्या कदम उठा रही है? इन परिवारों को भी समुचित सहायता राशि प्रदान करने पर केंद्र सरकार को विचार करना चाहिए़
शमीम अहमद, मेकॉन, रांची
