हाल में दिल्ली में प्रदूषण के नजर आये मामले काफी भयावह दिखते हैं. महानगरों में बढ़ते प्रदूषण के कारण लाखों जिंदगी को नुकसान पहुंच रहा है. राजधानी होने के बावजूद सरकार ने कोई सकारात्मक काम नहीं किये हैं. टूटी सड़के, उजड़े पार्क, अवैध कालोनियों में टूटी पाइप लाइन के कारण नरकीय स्थिति उत्पन्न हो गयी है. ठेकेदारों और अफसरों की दादागिरी व्याप्त है.
लोगों की शिकायतों पर कोई गौर नहीं किया जाता है. वर्तमान सरकार के पास इसका कोई हल नहीं है. नगरों के सुंदरीकरण की योजना भी खटाई में पड़ी है. पेड़-पौधों और हरियाली की बातें सिर्फ फाइलों तक सीमित है. सरकार जनता के कंधो पर ही यह सब डालकर बड़ी आसानी से मुक्ति पा लेती. यदि जनता ही यह सब करने लगे तो फिर सरकार के होने का कोई औचित्य नहीं है.
वेद, मामूरपुर , नरेला
