देश में जिस रात दीवाली मन रही थी, कुरुक्षेत्र जिले के गांव अंतहेरी में मातम पसरा था. गांव का एक लाल सेना का जवान मनदीप नियंत्रणरेखा पर पाकिस्तानी गोलाबारी में शहीद हो गया था. दीवाली के दिन गांव में उसका पार्थिव शरीर जिस रूप में पहुंचा, वह संकेत था कि पाकिस्तान भारत को चोट पहुंचाने के लिए आत्मघात की हद तक जा सकता है.
अक्तूबर के आखिर के हफ्ते से पाक फौजों की नापाक हरकतें किस कदर बढ़ गयी हैं, इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि पिछले 24 घंटों के दौरान नियंत्रणरेखा और सीमा से सटे कुछ गांवों में भीषण गोलाबारी में दस आम नागरिकों की भी जान चली गयी, जबकि करीब दो दर्जन लोग घायल हो गये.
‘सर्जिकल स्ट्राइक’ के बाद से पाक फौज ने जम्मू-कश्मीर में सीमा और नियंत्रण रेखा पर 63 दफे सीजफायर का उल्लंघन कर भारी गोलाबारी की है. इसमें 18 भारतवासी की जान जा चुकी है, जिनमें 12 आम नागरिक हैं. 80 से ज्यादा के घायल होने की भी खबर है. इस दौरान भारतीय सैनिकों ने सब्र का परिचय देते हुए सीमा-रेखा नहीं लांघी, सिर्फ पाकिस्तानी गोलों का जवाब दिया है.
लेकिन, निरंतर संगीन होते हालात संकेत कर रहे हैं कि पाकिस्तानी फौज फिर भारत के सब्र का इम्तिहान लेने पर आतुर है. पाकिस्तान की गोलाबारी में सैन्य-मर्यादाओं का भी पालन नहीं किया जा रहा. लगता है कि सीमावर्ती गांवों की महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को निशाना बना कर पाक फौज यह संदेश देना चाहती है कि उसके निशाने पर सिर्फ सीमा के प्रहरी ही नहीं, बल्कि हर भारतीय है. और, भारत के लिए यही सबसे बड़ी चिंता का सबब होना चाहिए कि आत्मघात पर उतारू पाक फौज अब आम नागरिकों पर भी घात कर रही है.
जम्मू-कश्मीर के उड़ी में आर्मी कैंप पर 18 सितंबर को पाक प्रेरित आतंकियों के हमले में 18 जवानों की शहादत का जवाब भारतीय सेना ने 28-29 सितंबर की रात पाक अधिकृत कश्मीर में आतंकी कैंपों पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ के जरिये दिया. माना गया था कि इससे पाक फौज अपनी नापाक हरकतों से बाज आयेगी. लेकिन, ताजा हालात इससे उलट संकेत दे रहे हैं.
खबर है कि पाकिस्तान ने सीमा से सटे इलाकों में सैनिकों और हथियारों की तैनाती भी काफी बढ़ा दी है. बेशक, भारत ने उड़ी हमले के बाद कूटनीति के मोरचे पर कामयाबी हासिल की और कई वैश्विक मंचों पर पाक को अलग-थलग कर दिया. इसी के भरोसे भारत ने सर्जिकल स्ट्राइक की सूचना भी दुनिया को दी. लेकिन, भारत-विरोध की अपनी ऐतिहासिक मनोग्रंथि से लिपटा पाकिस्तान इन दोनों कदमों से बौखला गया लगता है. उसके सत्ताकेंद्रों को ठीक-ठीक सूझ नहीं रहा कि वह करे तो क्या करे. कश्मीरी आवाम को आंदोलित करने और इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाने की उसकी कोशिशें पहले ही नाकाम हो चुकी हैं.
उल्टे ताकतवर मुल्कों ने नवाज सरकार को सीख दी कि वे अपनी सेना की भारत-विरोधी गतिविधियों पर लगाम लगाएं. जब ताकतवर मुल्कों ने पाक सरकार की तरफ आंख तरेरी, तो वहां की सेना को लगा कि सत्ता पर पकड़ मजबूत करने का यह अच्छा मौका है. ऐसी खबरें आने लगीं कि पाक में चुनी हुई सरकार और अपने को देश का खुदमुख्तार माननेवाली सेना के बीच का तालमेल तकरीबन टूट गया है. नवाज सरकार और पाक सेना के बीच घात-प्रतिघात का पुराना खेल फिर से शुरू हो गया है.
पाकिस्तान की अंदरूनी सियासत के जानकार बता रहे हैं कि नवंबर के आखिरी हफ्ते में रिटायर होनेवाले पाक सैन्य प्रमुख राहिल शरीफ को भारत के साथ तनातनी में अपने लिए मौका दिख रहा है.
आशंका है कि सीमा पर युद्ध के हालात पैदा कर वे सत्ता कब्जाने की कोशिश करें और पाकिस्तान के लहुलुहान लोकतंत्र की किस्मत फिर से एक जनरल के हाथों में कुछ सालों के लिए बंदी हो जाये. राहिल शरीफ के ऐसे इरादों के लिए पाकिस्तान का अंदरूनी राजनीतिक घटनाक्रम अनुकूल साबित हो रहा है. पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट ने पनामा पेपर्स मामले में नवाज शरीफ और उनके खानदान पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए न्यायिक आयोग गठित करने के आदेश दिये हैं.
यह मामला इस साल के शुरू में सामने आया था, जिसमें नवाज शरीफ की बेटी मरियम और बेटों हसन तथा हुसैन पर विदेश में कंपनी खोल कर गैरकानूनी ढंग से अनाप-शनाप धन बटोरने के आरोप लगे थे. इन आरोपों के बूते विपक्षी पार्टियां नवाज सरकार से इस्तीफे की मांग कर रही थीं. न्यायिक जांच के आदेश से विपक्ष के आरोपों को बल मिला है और नवाज सरकार के लिए फिलहाल मुंह छिपाने जैसी स्थिति बन गयी है.
ऐसे नाजुक वक्त में भारत के लिए बड़ी जरूरत है सीमावर्ती गांवों में अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना. साथ ही, पाकिस्तान में चल रहे सियासी नाटक के हर पहलू पर बारीक नजर रखते हुए सीमा और नियंत्रणरेखा पर पाकिस्तान की दुस्साहस का माकूल जवाब देने की अब तक की रणनीति पर नये सिरे से गौर करना चाहिए, ताकि देश का कोई और गांव अपने लाल की शहादत पर मातम मनाने के लिए विवश न हो.
