सरकारी दावों और विकास पर नजर डालें तो पायेंगे कि जिस विकास की बातें हो रही हैं, वह केवल एक खास वर्ग तक सीमित है. मौजूदा लोकतांत्रिक प्रणाली में राजनेताओं ने लोकलुभावन घोषणाओं से गरीबों को वोट बैंक मान कर याचक बना दिया है. वैश्वीकरण के इस दौर में हमारे देश का कुटीर उद्योग पतन की ओर जा रहा है. अफसोस यह है कि देश के नेता भुखमरी से लड़ने की बात नहीं करते.
बात भुखमरी से लड़ने की हो
हाल ही में जारी हुए ग्लोबल हंगर इंडेक्स-2016 में भारत को विश्व के 118 देशों में से 97वें नंबर पर दर्शाया गया है. सर्वे के अनुसार भारत में 39 प्रतिशत बच्चे कुपोषण के शिकार हैं. सरकारी दावों और विकास पर नजर डालें तो पायेंगे कि जिस विकास की बातें हो रही हैं, वह केवल एक […]

हाल ही में जारी हुए ग्लोबल हंगर इंडेक्स-2016 में भारत को विश्व के 118 देशों में से 97वें नंबर पर दर्शाया गया है. सर्वे के अनुसार भारत में 39 प्रतिशत बच्चे कुपोषण के शिकार हैं.
सुमित कु अंबष्ठ, हजारीबाग