आज की हाइटेक रामलीला

वीर विनोद छाबड़ा व्यंग्यकार हमें याद आता है एक प्राचीन मंदिर का बहुत बड़ा परिसर और उसमें बना चबूतरा. तीन तरफ से खुला. चौथे हिस्से में सिंहासन और उसके पीछे मेकअप रूम. पचास-साठ के दशक में वह चबूतरा रामलीला का स्टेज बन जाता था. गरीबों की रामलीला थी. आय का स्रोत, मंदिर में आया नकद […]

वीर विनोद छाबड़ा

व्यंग्यकार

हमें याद आता है एक प्राचीन मंदिर का बहुत बड़ा परिसर और उसमें बना चबूतरा. तीन तरफ से खुला. चौथे हिस्से में सिंहासन और उसके पीछे मेकअप रूम. पचास-साठ के दशक में वह चबूतरा रामलीला का स्टेज बन जाता था. गरीबों की रामलीला थी. आय का स्रोत, मंदिर में आया नकद चढ़ावा था और आरती में मिली रकम. जगह-जगह से रफू ड्रेसें. साधारण मेकअप. रोशनी के लिए गैसबत्ती और लालटेन का सहारा.

एक तरफ महिलाओं-बच्चों के बैठने का इंतजाम. शाम होते ही बच्चा लोग चटाई, दरी, बोरी बिछा देते. महिलाएं रात आठ बजे तक चौका-बरतन करके वहां जम जातीं. पूर्ण भक्ति-भाव से. बुर्के वालियां भी होती थीं. किसी में कोई प्रतियोगिता नहीं. सब आसपास के ही लोग थे. किसी को एक नंबर लगी, तो दौड़ कर घर हो लेता. कोई एक्टिंग नहीं करता. माइक नहीं थे. अतः संवाद जोर से बोलने पड़ते थे. पंडितजी चौपाई पढ़ते और भावार्थ समझ कर कलाकार अपना संवाद बोल देते.

स्त्री पात्रों के लिए लेडीज उपलब्ध नहीं थीं. मोहल्ले के खूबसूरत लौंडे ही कौशल्या, कैकई, सुमित्रा और सीता होते थे. एक बार शब्बीर को सीता बनाया गया. बड़े खुश हुए उसके अब्बा-अम्मी. तीन साल लगातार वह सीता रहा. एक बार मार-पीट के एक केस में लक्ष्मण को पुलिस पकड़ ले गयी. रामलीला कमेटी वाले बड़ी मुश्किल से छुड़ा कर लाये थे. अंत में रोज प्रार्थना होती थी- ऐ मालिक तेरे बंदे हम!

सत्तर का दशक आते-आते गरीबों की रामलीला दम तोड़ गयी. आज की रामलीला हाइटेक है. कलाकार फ्री में नहीं मिलते हैं. सब खुद को बाहुबली और रजनीकांत समझते हैं. सीता के लिए अभिनेत्री राम से डबल फीस मांगती है. रिस्क बहुत है आजकल. कोई उठा ले गया तो!

माहौल सर्जिकल है. मुंह बंद रखना है. पता नहीं कौन रावण है और कौन राम. रामलीला छोड़ो, फुरसत कहां. सीधा रावण दहन में पहुंचो. रावण में नवाज शरीफ फिट किये जा रहे हैं.

ज्यादा सवाल पूछनेवाले मेघनाद और कुंभकर्ण हैं. मंत्रीजी फूंक देंगे आज सबको. मंत्रीजी ने धनुष उठाया. टीवी चैनलों ने घेर लिया. पब्लिक को दिखता नहीं है, शोर मचा. आवाज आयी कि अब सीधे चैनल पर ही देखना. मंत्रीजी ने कमान खींची और उधर रावण धू-धू कर जल उठा. धाएं-धाएं पटाखे. चारों तरफ शोर ही शोर और आसमान में धुआं ही धुआं. चाइनीज टेक्नोलॉजी है.

भयंकर प्रदूषण. खामोश रहो! किसने की यह बात? देश की सीमा पर जवान का खून बह रहा है. देशद्रोही कहीं के. कहीं की बात कहीं जोड़ दी गयी. सबके कान में देशद्रोही शब्द पड़ा और बंदा पिट गया. और अच्छाई की बुराई पर विजय हो गयी.

सबके अपने राम हैं और अपने रावण. एक विद्वान बता रहे थे- रावण शक्तिशाली ही नहीं, विद्वानों का विद्वान भी था.

उसने हजारों साल तप किया. भगवान प्रसन्न हुए- क्या मांगता है? रावण ने कहा कि देव, दानव, गंधर्व, किन्नर में कोई भी उसका वध न कर सके. भगवान पूछे- मनुष्य और पशु? रावण ने अट्ठहास किया- ये तुच्छ कीड़े हैं. जब चाहूं मसल दूं. कोई भय नहीं इनसे. भगवान व्यंग्य से मुस्कुराये- तथास्तु!

रावण का आतंक बढ़ा, तो भगवान विष्णु ने मनुष्य-रूप में अवतार लेकर रावण का अंत किया. अतः हे मनुष्य! विद्वत्ता और ताकत पर घमंड मत कर. अन्यथा यही तेरे काल का कारण बनेगा. अगले दिन वह विद्वान पिट गया. रावण को विद्वानों का विद्वान बताता है. आप जितना भी बोलो, जिसको जितना सूट करता है, उतना ही ले उड़ता है.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >