आगे दौड़, पीछे छोड़!

शरू में केजरीवाल कहते थे कि मोदी देश संभालें और हम दिल्ली संभालेंगे़ मैं कभी दिल्ली छोड़ कर कहीं नहीं जाऊंगा़ लेकिन, दुर्भाग्य से हुआ क्या? सब ​उलट ही होता गया़ मोदी से जबरदस्त टकराव, संविधान और कायदे कानून की खुली ​धज्जियां उड़ाने और सिवाय अराजक राजनीति के उन्होंने कुछ न​हीं किया. उन्हें जनता जल्द […]

शरू में केजरीवाल कहते थे कि मोदी देश संभालें और हम दिल्ली संभालेंगे़ मैं कभी दिल्ली छोड़ कर कहीं नहीं जाऊंगा़ लेकिन, दुर्भाग्य से हुआ क्या? सब ​उलट ही होता गया़ मोदी से जबरदस्त टकराव, संविधान और कायदे कानून की खुली ​धज्जियां उड़ाने और सिवाय अराजक राजनीति के उन्होंने कुछ न​हीं किया.
उन्हें जनता जल्द ही पहचान गयी और ​दिल्ली नगर ​निगम ​की ​13 सीटों के उपचुनाव में एक अच्छा सबक भी ​दे डाला है और बाकी भी शायद जल्द मिल जायेगा़ अंततः अन्ना के सब्र का बांध भी टूट ही गया है़ कारण साफ है कि दिल्ली में 67 सीटें जीतने के बाद उनमें घमंड आ गया, जिससे ये अब बहुत लंबी छलांग लगा कर शायद देश के ही नहीं, अपितु शायद पूरी दुनिया के बादशाह बनना चाहते हैं. इसलिए दिल्ली को पीछे छोड़ वे अब देश और दुनिया की दौड़ में ही लगे हैं.
ऐसा करना कोई बुरी बात नहीं. मगर, पहले दिल्ली में ही अपने शानदार ​कार्यों की मिसाल ​​दी होती तो यह सब कुछ संभव होता. दिल्ली में पहले भी विरोधी पार्टियों की सरकारों ने मिल कर अनेक अच्छे ऐतिहासिक कार्य किये हैं जिन्हें जनता भूल नहीं सकती. इस तरह गलत तरीके से ​आगे बढ़​ने से कुछ हासिल नहीं होगा, क्योंकि जनता सही आधार और कार्य को ही देखती है.
वेद मामूरपुर, नरेला, दिल्ली

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