देश के शीर्ष न्यायालय के आदेशों की अवहेलना के मामले आजकल बढ़ गये हैं. पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस लोढ़ा समिति की सिफारिशें लागू न करने के लिए बीसीसीआइ (भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड) को फटकार लगायी थी. खेलों को बढ़ावा देने और उसमें पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रशासनिक सुधारों के लिए लोढ़ा समिति की सिफारिशों को लागू करने का आदेश सुप्रीम कोर्ट ने ही दिया था. लेकिन, बीसीसीआइ पर न तो शीर्ष अदालत के फैसले और न ही उसकी लताड़ का कोई असर पड़ा.
सुप्रीम कोर्ट के आदेश की पूरी तरह से अनदेखी करते हुए बीसीसीआइ ने हाल ही में एक राज्य एक वोट, 70 वर्ष की आयु सीमा, कार्यकाल के बीच में तीन साल का ब्रेक जैसी लोढ़ा समिति की अहम सिफारिशों को खारिज कर दिया. दूसरा उदाहरण कावेरी जल विवाद का है, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक सरकार को आदेश किया था कि तमिलनाडु के लिए कावेरी का पानी छोड़े. कर्नाटक सरकार ने भी सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना करते हुए तमिलनाडु को पानी देने से इनकार कर दिया है. तीसरा उदाहरण, कृष्ण जन्माष्टमी पर आयोजित होनेवाली दही-हांडी प्रतियोगिता में हांडी की ऊंचाई 20 फीट करने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश का है.
देशभर में कई जगहों पर दही-हांडी की ऊंचाई 30, 35, 40 फीट और इससे भी ज्यादा रखी गयी. ऐसा करके माननीय उच्चतम न्यायालय के इस आदेश की भी जान-बूझ कर धज्जियां उड़ायी गयीं. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या हमारे मन में सुप्रीम कोर्ट प्रति आदर खत्म हो चुका है, या अब किसी को इसकी कोई परवाह ही नहीं?
साक्षी पांडेय, धनबाद
