कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच कावेरी जल बंटवारा बड़ा पेचीदा मामला है़ आखिरकार कभी न कभी तो समझौता होना ही है, तो क्यों न दोनों राज्यों का नुकसान किये बिना कोई मसौदा तैयार किया जाये़ पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कर्नाटक में हिंसात्मक घटनाएं घटीं.
निजी व सार्वजनिक संपत्ति का करोड़ों रुपयों का नुकसान हुआ. एक बड़ा सवाल यह उठता है कि हमारे देश में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का भी पालन क्यों नहीं किया जा रहा है? केंद्र सरकार को चाहिए कि जिन राज्यों के बीच पानी के बंटवारे पर तनाव है, उसे सुलझाने के लिए मध्यस्थता करे. राज्य सरकारें भी देश और जनता के बारे में सोचें.
पायल बजाज, धनबाद
