पारा शिक्षक बार-बार हड़ताल करते हैं, लेकिन इनकी मांगें नहीं मानी जाती. ये लोग सरकारी शिक्षक के मुताबिक ज्यादा काम करते हैं, फिर भी इनका वेतन सरकारी शिक्षकों जैसा निश्चित नहीं है. इनका वेतन परियोजना के तहत होता है, जिससे इन्हें पता नहीं चलता कि इनका वेतन कब तक मिलेगा, जिससे इन्हें पारिवारिक समस्याओं का भी सामना करना पड़ता है. सातवें वेतन आयोग के अनुरूप इनकी सैलरी भी नहीं है और आज की महंगाई को देखते हुए इनकी मांग तो जायज है, लेकिन फिर भी इनकी मांग पूरी नहीं होती.
क्योंकि, पारा शिक्षक सही फैसला नहीं ले पाते हैं. पर्व या त्योहारों में हड़ताल कर देते हैं, जिससे बहुत सारे पारा शिक्षक हड़ताल तोड़ देते हैं. इनमें एकता नहीं बन पाती. इसीलिए जरूरी है कि उचित समय पर एकता के साथ हड़ताल करें, ताकि मांग पूरी हो सके. क्योंकि, बार-बार हड़ताल करने से पठन-पाठन तो प्रभावित होता ही है, साथ में बच्चों का भी नुकसान होता है.
दीपक कुमार, देवघर
