‘आपके टूथपेस्ट में नमक है?’ कई बार सुना गया है, मगर ‘आपके खाने में जहर है?’ ऐसा किसी ने नहीं पूछा. हंगामे बहुत पुराने नहीं हुए, जब डिब्बेबंद खाने में ‘सीसा’ की मिलावट ले कर खूब शोर-शराबे हुए थे. मगर हमारी रीति और नीति ऐसी है कि नतीजे से बेपरवाह हम हंगामे खूब करते हैं.
एक जांच बैठी, और सब कुछ सामान्य हो जाता है. देश में जहर का व्यापार खुलेआम होता है, मगर राजनीति कभी-कभी होती है. सड़क किनारे भिनभिनाती मक्खियों के आस पास लगे ठेले-खोमचों पर बिकनेवाली पानीपूरी, पकवानों के तेल व चाट मसाले जहरीले हैं या नहीं, कभी इनकी भी तो जांच हो.
एमके मिश्रा, रातू, रांची
