आजकल हर छोटी वस्तु के लिए भी दुकानदार पॉलीथीन बैग दे देते हैं, जिसे ग्राहक भी सुविधाजनक मानते हैं. मानो दुकानदार ग्राहक के बिना बोले ही उसके मन की बात समझ गया हो. हम जो भी वस्तु इस्तेमाल करते हैं, उसके साथ पॉलीथीन की थैली भी होती है.
हम चीजें निकाल कर पॉलीथीन बैग फेंक देते हैं. क्या हम कभी भी यह सोचते हैं कि फेंका हुआ पॉलीथीन जाता कहां है? यही पॉलीथीन बैग कई समस्याओं का मूल कारण हैं, जिसका नतीजा हमें सबसे गंदे राज्य के ठप्पे के रूप में भुगतना पड़ रहा है. बड़ी वस्तुएं खरीदने जायें तो साथ में कपड़े का थैला रखें. दुकानदार को चीजें पॉलीथीन में तौलने की बजाय कागज के लिफाफों में देने को कहें. उसे समझाएं कि पॉलीथीन से कितना नुकसान होता है. उसे बिना किसी कानून के भय के उसकी नैतिक जिम्मेदारी का आभास करायें. साथ ही उसे यह भी बतायें कि राज्य को साफ-सुथरा बनाने में वह कितनी अहम भूमिका अदा कर सकता है.
सीमा साही, बोकारो
