पीड़ा को समझें

ऐसा लगता है कि अधिकतर चिकित्सकों की दृष्टि में, मरीजों व उनकी देखरेख के लिए साथ जानेवाले लोगों के समय की कोई कीमत ही नहीं है. तभी तो वे प्राय: प्रतीक्षारत लोगों के साथ संवेदनहीनता का परिचय देते हुए अस्पताल, निजी क्लिनिक आदि जगहों पर विलंब से पहुंचना भी शान समझते हैं. ऐसे डॉक्टरों से […]

ऐसा लगता है कि अधिकतर चिकित्सकों की दृष्टि में, मरीजों व उनकी देखरेख के लिए साथ जानेवाले लोगों के समय की कोई कीमत ही नहीं है. तभी तो वे प्राय: प्रतीक्षारत लोगों के साथ संवेदनहीनता का परिचय देते हुए अस्पताल, निजी क्लिनिक आदि जगहों पर विलंब से पहुंचना भी शान समझते हैं. ऐसे डॉक्टरों से अनुरोध है कि वे मरीजों की पीड़ा और तीमारदारों के समय का जरा ख्याल रखें और समय से अस्पताल और क्लिनिक पहुंचें.

अनूप कुमार सिन्हा, रांची

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