भारत और बांग्लादेश के दरम्यान असम राज्य में पड़नेवाली 223 किमी की अंतरराष्ट्रीय सीमा आनेवाले एक साल में पूरी तरह बंद करने का निर्णय केंद्र सरकार ने लिया है. बांग्लादेश से घुसपैठ की वजह से सीमा बंद करने के लिए भारत को बड़ा खर्च करना होगा. इस सीमा से कई बांग्लादेशी घुसपैठिये भारत में घुस कर यहीं के हो जाते हैं. ये लोग यहां की जनता से सरकार की सुविधा लेने की होड़ मचाते हैं. जिन सुविधाओं पर मूल भारतीयों का पहला हक है, उसे बांग्लादेशी लूट ले जाते हैं. देश का यह बड़ा नुकसान है.
यदा-कदा स्थानीय जनता इन घुसपैठियों का विरोध भी करती है, लेकिन राज्य सरकार और प्रशासन से उन्हें इसके लिए समर्थन नहीं मिलता़ ऐसे में ये घुसपैठिये, स्थानीय आबादी का हक मारकर आराम से रह रहे हैं. इसका समाधान यह हो कि जब यहां की जनता बांग्लादेशी घुसपैठ का विरोध करे, तो इस कोशिश को सरकार की तरफ से पूरा सहयोग मिलते रहना चाहिए. कई सालों से देश इस परेशानी से गुजर रहा है, लेकिन उस पर कोई कड़ा फैसला न लिये जाने के कारण घुसपैठियों के लिए भारत में प्रवेश करना आसान हो गया. देखते हैं कि मोदी सरकार इसमें कितनी सफल होती है.
जयेश राणे, मुंबई
