उम्मीद जमालपुर जिमखाना की

जितना मुझसे बन पाया है, मैंने तुम पर अपना प्यार लुटाया है, रेलवे का उम्दा अफसर बनाकर, मैंने खुशी-खुशी तुम्हें अलविदा किया है, ऊंचे पदों पर विराजमान होकर, तुमने मेरा सिर फख्र से ऊंचा किया है, उपलब्धियों की खुशी तो बहुत हुई है, लेकिन आज विवशता छाई हुई है, इस घोर अंधेरे से मुझे निकालो, […]

जितना मुझसे बन पाया है,
मैंने तुम पर अपना प्यार लुटाया है,
रेलवे का उम्दा अफसर बनाकर,
मैंने खुशी-खुशी तुम्हें अलविदा किया है,
ऊंचे पदों पर विराजमान होकर,
तुमने मेरा सिर फख्र से ऊंचा किया है,
उपलब्धियों की खुशी तो बहुत हुई है,
लेकिन आज विवशता छाई हुई है,
इस घोर अंधेरे से मुझे निकालो,
तुम सहारा बनकर मुझे संभालो,
और लौटा दो मेरा वह जीवन,
जो है आज भी तुम पर अर्पण़
पूनम कुमारी साह, रांची

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