खुशी की बात है कि रेल विभाग कुछ ताजा सुधार कार्यों से अब आगे बढ़ने जा रहा है. अत्याधुनिक स्काडा तकनीक से बिजली की फिजूलखर्ची और इसके उत्पादन से प्रदूषण में कमी लाना, सूर्य की रोशनी से स्टेशनों पर बल्ब जलाना, कचरे से बिजली बनाना और रेल पटरियों के साथ पड़ी खाली जमीन पर हरियाली पैदा करना, वास्तव में उल्लेखनीय सुधार के प्रशंसनीय कार्य हैं.
इससे निश्चय ही प्रदूषण में कमी और पर्यावरण की रक्षा हो सकेगी. मोदी सरकार अच्छा करने का प्रयास कर रही है मगर कितना कुछ होगा यह तो समय ही बतायेगा.
आम यात्रियों की दयनीय और खतरनाक हालत को देखते हुए पैसेंजर ट्रेनों और स्टेशनों के बड़े गहन और बारीक निरीक्षण और सुधार की भी सख्त जरूरत है. यात्रियों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए इन ट्रेनों के फेरे बढ़ाना और कम से कम 22 डिब्बे लगाना बहुत ही जरूरी है. आशा है सरकार इस पर भी जरूर कुछ करेगी.
वेद प्रकाश, ई-मेल से
