बीते वर्ष की तुलना में इस वर्ष प्याज का बंपर उत्पादन हुआ है. कृषि प्रधान देश के लिए उत्पादन का यह स्तर निहायत ही खुशियों भरा है. लेकिन, अपने उत्पाद का उचित दाम नहीं मिलने तथा मांग के अपेक्षाकृत उत्पादन कम होने से देश के लाखों प्याज उत्पादक किसानों के चेहरे से खुशी गायब हो गयी है. यह उदासी स्वाभाविक है. जिन किसानों ने अपनी संपत्ति बेच कर या विभिन्न स्रोतों से कर्ज लेकर इस वर्ष प्याज की खेती की, वे मुनाफा न होता देख गहरे अवसाद में जा सकते हैं. मध्यप्रदेश के नीमच, इंदौर से लेकर सतना-मैहर तक प्याज के दाम कुछ इस कदर गिर गये हैं कि यकीन ही नहीं होता.
प्याज की बिक्री पर किसानों को प्रति किलो चार रुपये का घाटा हो रहा है. पिछले वर्ष, प्याज की गगनचुंबी कीमतों ने उपभोक्ताओं को रुलाया था और इस बार गिरती कीमतों ने इसके उत्पादकों को. उत्पादन अत्यधिक हो या कम नुकसान किसान को ही होता है. इस मसले पर सरकार ही कुछ हल निकले.
सुधीर कुमार, गोड्डा
