केंद्र का विज्ञापन खर्च

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने दो साल पूरे किये हैं. इस अवसर पर विज्ञापनों पर सरकार ने करोड़ों रुपये खर्च किये हैं. क्या सरकार ऐसे ही काम करेगी? विज्ञापनों पर हुआ यह बड़ा खर्च किसलिए? पूरे पन्ने के विज्ञापन में प्रधानमंत्री मोदी की तसवीर ने ही पूरी जगह अधिगृहित कर ली […]

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने दो साल पूरे किये हैं. इस अवसर पर विज्ञापनों पर सरकार ने करोड़ों रुपये खर्च किये हैं. क्या सरकार ऐसे ही काम करेगी? विज्ञापनों पर हुआ यह बड़ा खर्च किसलिए? पूरे पन्ने के विज्ञापन में प्रधानमंत्री मोदी की तसवीर ने ही पूरी जगह अधिगृहित कर ली थी. मोदी जी को मुख्य अंश के रूप में दर्शाना इन विज्ञापनों से सामने आता है.
जनता के पैसों की किसी को कुछ भी फिक्र नहीं है. इस तरह जनता का पैसा उड़ाना, लोकहित की किस श्रेणी में आता है? जनता तक सरकार की योजनाओं को पहुंचाना प्रशासन का काम होता है लेकिन प्रशासन की कर्मठता किसी से छिपी हुई नहीं है.
पहले उसे सुधारना जरूरी है, वरना योजनाओं के विज्ञापनों पर सरकार खर्च कराती रहेगी और योजना आयी कब और गयी कब, इसका पता भी नहीं लगेगा. विज्ञापनों पर होनेवाला खर्च कम से कम कैसे किया जाये और लोगों तक प्रशासन के माध्यम से योजना पहुंचने के लिए क्या कदम उठाने चाहिए, आज इस पर गौर जरूरी है.
जयेश राणे, मुंब

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