बदलाव की चाहत

समय बदल रहा है, लोग बदल रहे हैं, नीतियां बदल रही है और लोगों की मांग बदल रही है. कोई चाहता है सरकार बदल जाये, कोई चाहता है देश बदल जाये, कोई चाहता है धर्म बदल जाये, तो कोई चाहता है जाति बदल जाये. सभी को आरक्षण की चाहत है. जब ऐसी ही संभावनाओं की […]

समय बदल रहा है, लोग बदल रहे हैं, नीतियां बदल रही है और लोगों की मांग बदल रही है. कोई चाहता है सरकार बदल जाये, कोई चाहता है देश बदल जाये, कोई चाहता है धर्म बदल जाये, तो कोई चाहता है जाति बदल जाये.

सभी को आरक्षण की चाहत है. जब ऐसी ही संभावनाओं की बाढ़ आ रही है, तो निश्चित ही केंद्र सरकार को भी बदलाव की तरफ कुछ कदम उठाना चाहिए और यह कदम ऐसे होने चाहिए जिससे भ्रष्टाचार,अनर्गल तरीके से अभिव्यक्ति की आजादी का प्रयोग करनेवाले, गलत हाथों को कुरसी का लाभ देनेवाले, साथ ही देश का विकास भूल कर जाति और धर्म की डुगडुगी बजा कर जनता को तमाशा बनानेवालों पर अंकुश लगाया जा सके. केंद्र सरकार और राज्य सरकार को कुछ न कुछ करना होगा, जिससे अधिक से अधिक लाभ कमजोर व वंचित वर्ग तक पहुंचे और शोषण करनेवालों पर नियंत्रण लगाया जा सके.

सुनील यादव, मलकौली बलिया

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