किसी समारोह, विवाह व अन्य अवसरों पर खुशी जाहिर करने के लिए लाखों रुपये के पटाखे जला दिये जाते हैं. इससे पर्यावरण को तो नुकसान होता ही है, इसके साथ ही अस्थमा और दिल की बीमारियों के मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है.
पिछले दिनों केरल के एक मंदिर में पटाखों ने कई लोगों का जीवन छीन लिया. जीवन या प्रदूषण की जो लोग परवाह नहीं करते, बाद में उन्हें उसकी कीमत चुकानी पड़ती है. मेरी राय में सरकार को आतिशबाजी पर पूर्ण प्रतिबंध लगा देना चाहिए, तभी अनमोल जीवन और पर्यावरण की रक्षा हो सकती है.
जूही मिश्रा, जमशेदपुर
