समाधान से पहले समस्या तो समझें

देश में आज कल आम आदमी पार्टी की चर्चा आम हो गयी है. गली मोहल्ले, चाय दुकान से लेकर न्यूज चैनलों में भी इसके वर्तमान और भविष्य पर घंटों चर्चा हो रही है. युवा वर्ग खासा उत्साहित है और कई तो पार्टी में शामिल हो रहे हैं, जिससे वे भ्रष्टाचार को खत्म कर सकें. लेकिन […]

देश में आज कल आम आदमी पार्टी की चर्चा आम हो गयी है. गली मोहल्ले, चाय दुकान से लेकर न्यूज चैनलों में भी इसके वर्तमान और भविष्य पर घंटों चर्चा हो रही है. युवा वर्ग खासा उत्साहित है और कई तो पार्टी में शामिल हो रहे हैं, जिससे वे भ्रष्टाचार को खत्म कर सकें.

लेकिन इनके विचारों में भ्रष्टाचार को लेकर एक बारीक कमी झलकती है. ज्यादातर लोगों के लिए इसका मतलब थाने, डीटीओ ऑफिस और ट्रैफिक पुलिस को दिये जाने वाले 100-200 रुपये तक सीमित है.

गौर करें तो पायेंगे कि एक नौकरीपेशा या निश्चित आय वर्ग वाले व्यक्ति के लिए इससे ज्यादा रिश्वत देने के अवसर कम ही आते हैं.यही कारण है कि उत्साहित युवा वर्ग सोचता है कि वे खुद ये रिश्वत ना दें और बाकी लोगों से इसकी अपील करें तो देश से भ्रष्टाचार खत्म हो जायेगा.

दरअसल इस समस्या का एक प्रकार है, जिसमें आप एक सुविधा पाने के लिए, जैसे बिना टेस्ट दिये लाइसेंस बनवाना या काम जल्दी कराने के लिए रुपये देना शामिल है.आप रुपये ना दें तो वह सुविधा नहीं मिलेगी. आपका समय ज्यादा लगेगा. अब जरा भ्रष्टाचार के दूसरे प्रकार को देखें.

मसलन सड़कों पर सब्जी विक्रेताओं द्वारा अतिक्र मण किया जाता है. वे पुलिस को कुछ पैसे देते हैं. आम आदमी को भी सब्जियां बिल्कुल रास्ते में, बिना अपनी गाड़ी से उतरे मिल जाती हैं.

अब ऐसे भ्रष्टाचार का विरोध कौन करेगा, जिसमें क्रेता, विक्रे ता और पुलिस तीनों का फायदा है. इसका ही बृहत् रूप आप विभिन्न परियोजनाओं में देखेंगे. जनता को बिजली चाहिए, उद्यमी बिजली उत्पादित कर बेचेंगे, परियोजना के जांच अधिकारी और अनुमति देनेवाले मंत्री पैसे लेंगे. इसे कैसे रोका जाये? समस्या का समाधान तो है, लेकिन पहले आप समस्या को समझ तो लें.

राजन सिंह, रांची

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