मैं कक्षा 6-8 में झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण हूं. लेकिन डिग्री होने के बावजूद हम बेरोजगार हैं. राज्य में हजारों की संख्या में शिक्षकों की सीटें खाली हैं, पर न जाने क्यों नियुक्तियां नहीं हो पा रही हैं. अगर हो रही हैं, तो बेरोजगारों के साथ सिर्फ राजनीति हो रही है.
इससे न सिर्फ छात्रों का नुकसान हो रहा है, बल्कि राज्य के भविष्य के साथ भी खिलवाड़ किया जा रहा है. इसके गंभीर परिणाम आनेवाली पीढ़ी को भुगतने पड़ेंगे. अगर राज्य सरकार नियुक्ति करना चाहती है, तो फिर करती क्यों नहीं है? रोज नये नाटक क्यों करती है? रोज अभ्यर्थियों के सपने क्यों तोड़ती है?
अगर नियुक्ति नहीं करनी है, तो सरकार साफ घोषणा कर दे कि हम नियुक्ति नहीं कर पायेंगे. सरकार छात्रों की धैर्य की परीक्षा न ले, अन्यथा यहां की सरकार का हाल भी दिल्ली की कांग्रेस सरकार की तरह हो जायेगा.
आनंद कुमार साहू, कोलेबिरा
