अजीब बात है कि पिछले दो वर्षों से नेताओं, विधायकों और मंत्रियों की डिग्रियों पर ड्रामा चल रहा है. इसमें कुछ की सच्चाई सामने आयी है और कुछ की अभी बाकी है. अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डिग्रियों पर केजरीवाल उंगली उठा रहे हैं. आश्चर्य तो यह है कि देश और जनता के जरूरी कार्यों को छोड़ कर विरोध और टकराव में समय व शक्ति नष्ट की जा रही है. त्याग व सेवा से ही स्थायित्व और सुशासन से सम्मान अर्जित किया जा सकता है, जो नेताओं की सोच से शायद अभी कोसों दूर है.
वेद मामूरपुर, नरेला
