पिछले दो वर्षों से रूठे मौसम की मार झेल रहे भारतीय किसान अपना धैर्य खोने को विवश होते जा रहे हैं. भयानक सूखा व भीषण जल-संकट किसानों की जिंदगी में यमराज का रूप धारण कर उन्हें इस जहां से दूर ले जाने को उतारू दिख रहे हैं. अब तक तो यमराज रूपी यह त्रासदी कई किसानों को काल के गाल में समाहित कर चुकी है.
इस वर्ष तो पारे ने भयंकर रूप अख्तियार कर रखा है. देश के 200 जिलों के 50 करोड़ से ज्यादा की आबादी पानी की बूंदों के लिए तरसती दिख रही है. मौसम के लगातार वार से मामला गंभीर होता जा रहा है़ ऐसे में मौसम विभाग ने अच्छे मानसून की भविष्यवाणी कर नयी उम्मीदें बांधी हैं.
आदित्य शर्मा, ई-मेल से
