न्याय तंत्र की दोहरी चुनौती!

आज भारतीय न्याय तंत्र दोहरी चुनौतियों से जूझ रहा है. एक तरफ, न्यायाधीशों की नियुक्ति तो दूसरी ओर लंबित मामलों के निबटारे की दोहरी चुनौती है. देश में न्यायाधीशों के रिक्त पदों पर नियुक्ति न होने के कारण लंबित मामलों की लंबी फेहरिस्त पर चर्चा करते हुए सर्वोच्च न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश तीरथ सिंह ठाकुर […]

आज भारतीय न्याय तंत्र दोहरी चुनौतियों से जूझ रहा है. एक तरफ, न्यायाधीशों की नियुक्ति तो दूसरी ओर लंबित मामलों के निबटारे की दोहरी चुनौती है. देश में न्यायाधीशों के रिक्त पदों पर नियुक्ति न होने के कारण लंबित मामलों की लंबी फेहरिस्त पर चर्चा करते हुए सर्वोच्च न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश तीरथ सिंह ठाकुर पिछले दिनों भावुक हो गये़
गौरतलब है कि प्रधान न्यायाधीश और राष्ट्रपति लगातार इस विषय पर सरकार का ध्यानाकर्षण करते आ रहे हैं, लेकिन आज भी प्रशासनिक उदासीनता के कारण अदालतें, न्यायधीशों की संख्या से जूझ रही हैं. विधायिका और कार्यपालिका के सदस्य इस मुद्दे पर चर्चा कर कुछ हल निकालें.
सुधीर कुमार, गोड्डा

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