‘आप’ के वायदों की कीमत देश चुकायेगा

आम आदमी पार्टी (आप) और उसकी दिल्ली सरकार की आर्थिक-सामाजिक दृष्टि देश के गरीबों का शोषण और उत्पीड़न बढ़ानेवाली है. दिल्ली सरकार ने 48 घंटे के अंदर अपनी जनता के मध्य वर्ग को दो बड़े तोहफे दिये. पहला, प्रत्येक पानी मीटर वाले घर को प्रतिदिन मुफ्त 667 लीटर पानी. दूसरा, 400 यूनिट तक की बिजली […]

आम आदमी पार्टी (आप) और उसकी दिल्ली सरकार की आर्थिक-सामाजिक दृष्टि देश के गरीबों का शोषण और उत्पीड़न बढ़ानेवाली है. दिल्ली सरकार ने 48 घंटे के अंदर अपनी जनता के मध्य वर्ग को दो बड़े तोहफे दिये. पहला, प्रत्येक पानी मीटर वाले घर को प्रतिदिन मुफ्त 667 लीटर पानी. दूसरा, 400 यूनिट तक की बिजली खपत पर आधे दाम की छूट. पानी-बिजली के मीटरवाले घर अधिकतर मध्य वर्ग के ही हैं. दिल्ली के सबसे गरीब लोगों के पास ये मीटर नहीं हैं. संभवत: उन गरीबों को इन अनुदानों का फायदा नहीं मिलेगा.

‘आप’ की दिल्ली सरकार ने यह बताने की तकलीफ नहीं उठायी है कि इन बड़े आर्थिक अनुदानों की कीमत कहां से उगाही जायेगी? केजरीवाल के मुताबिक केवल बिजली के इस अनुदान पर 200 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च आयेगा. उनके द्वारा यह बताना कि बिजली कंपनियों पर 140 करोड़ का बकाया इसकी क्षतिपूर्ति करेगा, गलत दिलासा देना और एक झूठ है, क्योंकि वह केवल एक बार मिलने वाली राशि है न कि कोई सतत आय स्रोत. उन्होंने मुफ्त पानी के अनुदान का तो कोई हिसाब ही नहीं बताया है. दिल्ली में देश का सबसे धनी और विलासिता पर खर्च करनेवाला वर्ग भी रहता है. यह अनुदान उनसे ज्यादा टैक्स वसूल कर उगाहा जा सकता है. इस ऊंचे टैक्स उगाही की कोई योजना न तो ‘आप’ के घोषणा पत्र में थी और न ही उनकी सरकार की घोषणाओं में है.

जाहिर है कि ‘आप’ इन आर्थिक तोहफों का पैसा केंद्र सरकार के अनुदानों से लेना चाहती है. दिल्ली को ज्यादा अनुदान देने के लिए केंद्र सरकार को देश के अन्य हिस्सों की गरीब जनता के अनुदान घटाने या उन पर नये टैक्स लादने पड़ेंगे. क्या यह सही होगा?

चंद्र भूषण चौधरी, रांची

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